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शिक्षा क्या है?
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शिक्षा क्या है? जे. कृष्णमूर्ति जिड्डू कृष्णमूर्ति (1895-1986) ने धर्म, अध्यात्म, दर्शन, मनोविज्ञान व शिक्षा को अपनी अंतर्दृश्टि के माध्यम से नये आयाम दिए। छह दशकों से भी अधिक समय तक विश्व के विभिन्न भागों में, अलग-अलग पृष्ठभूमियों से आए श्रोताओं के विशाल समूह कृष्णमूर्ति के व्यक्तित्व तथा वचनों की ओर आकर्षित होते रहे, पर वे किसी के गुरु नहीं थे, अपने ही शब्दों में, वे तो बस एक दर्पण थे, जिसमें इंसान खुद को देख सकता है। वे किसी विशेष समूह के नहीं, सच्चे अर्थों में समस्त मानवता के मित्र थे। शिक्षा कृष्णमूर्ति फाउंडेशन द्वारा संचालित शिक्षा-संस्थानों में जाकर पर्याप्त समय रहते थे। वहां जीवन के विविध प्रश्नों पर विद्यार्थियों व शिक्षकों के साथ नियमित रूप से उनका संवाद होता था। 1934 में स्थापित ‘राजघाट बीसेंट स्कूल’ भी इन्हीं शिक्षा संस्थानों में से है। युवा मन में जो प्रश्न उठते हैं, उनका सीधा संबंध दैनिक जीवन से होता है। कृष्णमूर्ति की शिक्षाओं की अर्थवत्ता को भी दैनिक जीवन की कसौटी पर ही परखा जा सकता है। दार्शनिक अवधारणाओं, आध्यात्मिक संकल्पनाओं एवम् धार्मिक, मनोवैज्ञानिक तथा शैक्षिक रूढ़ियों के उलझाने वाले घेरे से हटकर ठेठ जिंदगी से जुड़े हुए प्रश्नों की पड़ताल ही ‘शिक्षा क्या है’ की विषय वस्तु है। प्रश्न उत्तरों का यह अपूर्व संगम वाराणसी के गंगा तट पर स्थित राजघाट के सुरम्य वातावरण में हुआ था। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रांगण में दी गई कृष्णमूर्ति की तीन वार्ताएर्ं भी प्रस्तुत कृति में संकलित हैं। इस कृति में विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई है। भय तुलना सुरङा आदत पहल अनुशासन महǷवाकांङा परंपरा ईझ्याµ ताकत आनंद आधा-अधूरापन शांति धर्म अपनेमन को समझना

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