
खूबियों से भरी है रील बनाने वाली पीढ़ी
— 19 साल के एक लड़के ने 5 ऐसी बातें सिखाईं, जो कई डिग्री और वर्षों का अनुभव भी नहीं सिखा पाता। पूरा लेख पढ़िए, शायद आपकी सोच बदल जाए।
— Gen Z से चिढ़िए मत, ज़रा ठहरकर सीखिए
नमिता जोशी
हम यानी Gen X और मिलेनियल्स जब किसी 19-20 साल के लड़के या लड़की को हाथ में फोन थामे, भरे बाजार में रील्स बनाते या बेफिक्र अंदाज़ में घूमते देखते हैं, तो हमारा पहला रिएक्शन अक्सर एक हल्की-सी तंज़ भरी मुस्कान या फिर चिंता वाली आह होती है। हमें लगता है कि क्या होगा इनका? ये रील वाली पीढ़ी सिर्फ मस्ती में डूबी है, सीरियसनेस नाम की चीज़ तो इनमें बची ही नहीं। वगैरह वगैरह। लेकिन ज़रा ठहरिए।
एनबीटी के ऑफिस आए 19 साल के अभिनव बिष्ट की बातें जानकर और अपने आसपास मौजूद जेन ज़ी को देख अगर आपने भी उन्हें यही समझा तो आपने असली मेसेज मिस कर दिया। इनकी बातों में जो साफगोई है, प्रैक्टिकल समझ है और जो भी वे कर रहे हैं, उस काम को लेकर जुनून है, वह हमारी जेनरेशन के बड़े-बड़े डिग्रीधारियों में ढूंढने से नहीं मिलता। अपनी ज़िंदगी में स्ट्रगलर का तमगा लगाकर घूमने वाले हम पुराने लोग, इस नई Gen Z से आखिर क्या सीख सकते हैं?
हमें बचपन से सिखाया गया कि 12वीं के बाद फॉर्म भरो, कॉलेज जाओ, डिग्री लो और फिर नौकरी ढूंढो। चाहे दिल उस काम में लगे या न लगे। लेकिन जंतर मंतर पर अपनी फनी रील्स से वायरल हुआ अभिनव बिष्ट कहता है, 'मैं कॉन्टेंट क्रिएटर बनना चाहता था, लेकिन पढ़ाई भी ज़रूरी है।' सुनने में यह एक सिंपल सी लाइन लगती है, पर दरअसल यही Gen Z का असली फ़ंडा है कि चिल रहो पर क्लियर रहो। उसने 12वीं के बाद कोई फालतू फॉर्म नहीं भरा। वह पढ़ाई कर रहा है (ऑनलाइन/ओपन से), लेकिन उसका पूरा फोकस अपने पैशन पर है। यानी अपने पैशन को शर्म की तरह नहीं, पहचान की तरह जीना चाहिए।
हम अक्सर संसाधनों का रोना रोते हैं। कइयों को यह कहकर रोते हुए सुना कि हमारे पैरंट्स को तो यह अवेयरनेस ही नहीं थी उस जमाने में कि बच्चों को स्कूल के बाद क्या पढ़ाना है, वरना हम भी आज किसी बड़ी कंपनी के सीईओ होते। लेकिन जेन ज़ी प्रैक्टिकल है। एडिटिंग के लिए अच्छे कंप्यूटर की ज़रूरत पड़ी, तो अभिनव ने घर वालों के आगे रोना नहीं रोया या किसी से पैसे नहीं मांगे। उसने 3-4 महीने खुद जॉब की, पैसे जोड़े और कंप्यूटर खरीदा। Gen Z सिखाती है कि अगर रास्ता नहीं दिख रहा, तो खुद बनाओ।
फिर तीसरे सबक पर आते हैं। हम किसी को अपना इंट्रो देते हैं तो हमारी पहचान एक लाइन में सिमट जाती है कि मैं जर्नलिस्ट हूं या मैं बैंक में हूं। उधर, Gen Z कहती है, मैं स्टूडेंट हूं, क्रिएटर हूं, ऐक्टर हूं, गेमर हूं और बहुत कुछ सीख रहा हूं। हम दोनों की जेनरेशन का यह फर्क छोटा नहीं है। एक ही समय में कई रोल निभाना, बिना गिल्ट के Gen Z की ताकत है। Millennials अक्सर अपनी क्षमता से ज्यादा काम लेकर उसी में फंस रहते हैं, Gen X संतुष्ट से बैठे रहते हैं लेकिन जेन ज़ी नदी की धारा की तरह फ्लुइड है।
हमारे जमाने के लोगों के लिए नेटवर्क मतलब कॉन्टैक्ट्स हुआ करता था या ज्यादा से ज्यादा LinkedIn लेकिन Gen Z के लिए नेटवर्क मतलब, कम्युनिटी। कम्युनिटी किसी धर्म, संप्रदाय या जाति वाली नहीं, सोशल मीडिया वाली जिसमें वे किसी सामाजिक या पर्सनल cause से जुड़े रहें। उनके फॉलोअर्स, कमेंट्स, DMs ये सब उनके लिए रिश्ते हैं। वे लोग हर समय अपनी कम्युनिटी, ऑडियंस से जुड़े रहते हैं, उनसे बात करते रहते हैं और वहीं से ग्रो करते हैं।
मिलेनियल्स अधिकतर मामलों में रिस्क लेने से डरते हैं या फिर ऐसा रिस्क ले डालेंगे कि अपना सब कुछ झोंक देंगे। जबकि जेन ज़ी कहते हैं कोई काम पसंद हो तो उसे ट्राय करो, गिरो, सीखो पर बैकअप रखो। अभिनव ने खुलकर कहा, 'हमसे पहले की जेनरेशन को तो डर और शर्म खा गई।' बिल्कुल सही बात। Gen Z खुलकर कहती है, मुझे ब्रेक चाहिए। मैं ठीक नहीं हूं, जब ठीक फील करूंगा या करूंगी तो बात करेंगे। इसे सेल्फ-अवेयरनेस कहते है। सीख यही है कि खुद को समझना कमज़ोरी नहीं, स्किल है। साभार नभाटा
रील बनाने में Gen Z क्यों आगे है?
हाँ, रील (Instagram Reels, YouTube Shorts, TikTok आदि) बनाने और देखने में सबसे सक्रिय पीढ़ी अक्सर Gen Z मानी जाती है, लेकिन यह कहना कि "रील बनाने वाली असाधारण पीढ़ी केवल Gen Z है" पूरी तरह सही नहीं होगा।
Gen Z कौन है?
Gen Z में आमतौर पर 1997 से 2012 के बीच जन्मे लोग शामिल माने जाते हैं (हालाँकि विभिन्न संस्थाओं की परिभाषाओं में थोड़ा अंतर हो सकता है)। यह पीढ़ी स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के साथ बड़ी हुई है, इसलिए इन्हें अक्सर "डिजिटल नेटिव" कहा जाता है।
रील बनाने में Gen Z क्यों आगे है?
मोबाइल कैमरा और एडिटिंग ऐप्स का सहज उपयोग।
छोटे (15–90 सेकंड) वीडियो के माध्यम से अपनी बात कहना पसंद करना।
ट्रेंड, मीम, संगीत और वायरल चुनौतियों में सक्रिय भागीदारी।
कंटेंट क्रिएशन को करियर और कमाई के अवसर के रूप में देखना।
नए सोशल मीडिया फीचर्स को जल्दी अपनाना।
क्या केवल Gen Z ही रील बनाती है?
नहीं। आज:
Millennials (1981–1996) भी बड़ी संख्या में रील बनाते हैं, विशेषकर व्यवसाय, शिक्षा, फिटनेस, यात्रा और व्यक्तिगत ब्रांडिंग के लिए।
Gen X और कुछ Baby Boomers भी अपने व्यवसाय, शौक या सामाजिक संदेशों के लिए शॉर्ट वीडियो बनाते हैं।
क्या रील संस्कृति का प्रभाव पड़ा है?
इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू हैं।
सकारात्मक
रचनात्मकता और अभिव्यक्ति का मंच।
नए कौशल और ज्ञान साझा करने का आसान माध्यम।
छोटे व्यवसायों और क्रिएटर्स के लिए कम लागत वाला प्रचार।
आय और रोजगार के नए अवसर।
चुनौतियाँ
अत्यधिक स्क्रीन टाइम।
लाइक्स और व्यूज़ पर अधिक निर्भरता।
गलत जानकारी का तेजी से प्रसार।
तुलना और सामाजिक दबाव।
ध्यान केंद्रित रखने की क्षमता पर संभावित प्रभाव।
निष्कर्ष: रील संस्कृति का सबसे बड़ा चेहरा Gen Z है, लेकिन यह केवल उसी पीढ़ी तक सीमित नहीं है। आज लगभग हर आयु वर्ग के लोग शॉर्ट-वीडियो प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग कर रहे हैं; अंतर केवल उपयोग के उद्देश्य और शैली का है।