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चलते दृश्य
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लघुकथा संग्रह....112 पेज.... 111 लघुकथाएं.... एक बानगी पढ़ें——— एहसास:.... दनदनाती हुई लाल बत्ती की एक मर्सिडीज कार गली के कोने से गुजरी। उसी मोड़ पर कांता बाई अपने टूटे-फूटे मकान में रहती थी। तभी उसने देखा कि दो श्वान के बच्चे अपनी माँ के साथ खेल रहे थे। कुछ पलों बाद अचानक उनके चीखने की आवाज कांता बाई के कानों में पड़ी। उसने पर्दे से बाहर झांक कर देखा, तो वह सामने का दृश्य देखकर विचलित हो गई। उसके मन की ममता तड़प कर रुदन करने लगी। मन में उठती टीस को समेटते हुए वह बाहर आई। उसने देखा कि उस श्वान को गाड़ी वाला रौंद कर चला गया था। उसका खून से सना शव देख उसके पिल्ले बिलखने लगे। गरीब कांता बाई उन श्वान के दोनों बच्चों को अपनी गोद में उठा लाई। तभी उसके मन में एक ममतामयी माँ का एहसास जो जीवंत था। जिसे उसे बरसो से अपनों के करीब रहकर भी नही मिला था। वह एहसास वह उन श्वान के बच्चों को अपने आँचल में रखकर महसूस करने लगी। सोच में डूब गई... कि समय आने पर ये लोग हमारी गरीबी को ढाल बनाकर इस्तेमाल करते है...., यह तो बेचारे निर्दोष श्वान हैं! उसकी आँखों से ममत्व के आंसू छलकने लगे।

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