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मुस्लिम समाज-परिवार की लघुकथाएं
Written by -  डा. तारिक असलम ‘तस्नीम’
Published by -  Astrovision

आज दुनिया में मुसलमानों के नाम पर जो लोग जिहाद और आतंक की जिस कार्रवाई को खुदा का हुक्म बता रहे हैं और मरने के बाद हूरों के साथ जन्नत में अन्तहीन जीवन की कामनाओं को हवा दे रहे हैं दरअसल यह पूरी कौम को गुमराह कर रहे हैं। इन हालात से मैं खुद को शर्मिन्दा अनुभव करता हूं। खुदा पर ईमान का मतलब रब की तलाश है न कि उसके नाम पर कत्लेआम।जिसके दिल में रब का डर नहीं। वह इंसान नहीं। ऐसे तमाम लोगों से मिलते जुलते और उनकी सोच के दायरे में कदम रखते हुए मेरी निगाहों ने जो कुछ देखा और कानों ने सुना और उसके जो नतीजे देखने को मिले। मैंने हमेशा पूरी ईमानदारी से अपनी कलम का विषय बनाने औेर जमाने को उसके गढ़े हुए सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक,धार्मिक तथा पारंपरिक संरचना के दुष्परिणामों को नतीजे के साथ पाठकों को अवगत कराने का प्रयास किया है।

मुस्लिम समाज-परिवार की लघुकथाएं


Soft Copy 

ISBN : 111111111111




Mrp of Paperback : ₹ 20