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शिवं शांतं जगन्नाथं लोकानुग्रहकारकम्। नमामि शिरसा देवं किं नो दुःखं भविष्यति।। वैदिक सनातन संस्कृति में भगवान शिव को कल्याणकारी, करुणामय तथा भक्तों के दुःखों का नाश करने वाला देव माना गया है। इतना ही नहीं, उन्हें देवों के देव महादेव माना गया है। वे आदिदेव, आदियोगी, महायोगी और सम्पूर्ण सृष्टि के आधार हैं। सृष्टि के प्राकट्य और अनादि काल से ही संपूर्ण ब्रह्मांड में उनकी दिव्य पूजा-अर्चना, योग-ध्यान, गहन साधना और अनन्य भक्ति की जा रही है। यह सनातन संस्कृति के प्रत्येक शिवभक्त के प्राणों में रची-बसी है। भगवान शिव की आराधना केवल एक पारंपरिक धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण चराचर जगत के अस्तित्व, मानसिक शुद्धि, शारीरिक स्वास्थ्य, आत्मिक चेतना और समस्त इंद्रियों को परम पवित्र व जागृत करने का सर्वोत्तम माध्यम है। इस अलौकिक अनुष्ठान से न केवल साधक को इस नश्वर संसार में रहते हुए शुचिता, पूर्ण स्वास्थ्य एवं ऐश्वर्य-समृðि की प्राप्ति होती है, अपितु संपूर्ण ब्रह्मांड और प्राणिमात्र के परम कल्याण व अंततः जीवन-मुक्ति ;मोक्षद्ध का मार्ग प्रशस्त होता है। ‘वैदिक शिव पूजा प्रकाश’ पुस्तक के लेखन का मुख्य उद्देश्य चराचर जगत के प्रत्येक मानव जीवन के कल्याण हेतु शिव पूजन की शास्त्रोक्त एवं सम्पूर्ण विधि को अत्यंत ...