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इस अंक में पढ़ें दीप पर्व: निश्छल मन का दीपोत्सव...आंगन—आंगन दिवाली...मिट्टी के दीयों में...दिवाली पर पूरी हुई ख्वाहिश... सजी...सभ्यता के अनसुलझे रहस्य...स्वाद का भी अमृत—सर...धन का धर्म और मर्म...खन—खन करता इतिहास...दोष देने से पहले...वन में मन का सुकून...दूर लगी है दूरबीन...फनीश्वरनाथ रेणु की कहानी पंचलाइट...जाड़े की आहट संग गर्माहट...शरीर कुछ कहना चाहता है...चमक ही नहीं, समझ भी परखें...उम्र का चक्र पलट दें जेलीफिश...जंगल का संजाल...